गंगा भक्ति आश्रम का 45वां स्थापना दिवस विशाल संत समागम एवं गुरु महिमा के संदेशों के साथ संपन्न


ममता चौहान

हरिद्वार, खड़खड़ी। पवित्र धर्मनगरी हरिद्वार के खड़खड़ी स्थित गंगा भक्ति आश्रम का 45वां स्थापना दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ भव्य रूप में संपन्न हुआ। यह दिव्य आयोजन प्रातःस्मरणीय गुरु भगवान राघवेंद्रानंद महाराज की पावन कृपा एवं आशीर्वाद से तथा आश्रम के पूज्य महंत स्वामी कमलेशानंद जी महाराज के सानिध्य में आयोजित किया गया। स्थापना दिवस के अवसर पर विशाल संत समागम का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे संत-महात्माओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चन एवं गुरु वंदना के साथ हुआ। आश्रम परिसर भक्तों की भारी उपस्थिति से भक्तिमय वातावरण में परिवर्तित हो गया। संत-महापुरुषों के मुखारविंद से प्रवाहित हुई दिव्य ज्ञानगंगा ने उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म, अध्यात्म और मानव जीवन के उच्च आदर्शों का संदेश प्रदान किया। संतों ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा माना गया है, क्योंकि गुरु ही अज्ञानरूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं।
इस अवसर पर पूज्य स्वामी कमलेशानंद जी महाराज ने गुरु महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि वह दिव्य शक्ति हैं जो मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करती है। गुरु के मार्गदर्शन से ही व्यक्ति अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझ पाता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अंधकार में दीपक मार्ग दिखाता है, उसी प्रकार गुरु जीवन के कठिन मार्गों में प्रकाश बनकर साधक का पथ प्रशस्त करते हैं। गुरु कृपा के बिना आत्मिक उन्नति संभव नहीं है और गुरु के सानिध्य से ही मनुष्य का जीवन सफल, सार्थक और कल्याणकारी बनता है।
उन्होंने आगे कहा कि गुरु अपने शिष्यों को केवल धार्मिक शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि उन्हें सत्य, प्रेम, सेवा, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देते हैं। गुरु का सानिध्य मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है और उसे ईश्वर की ओर अग्रसर करता है। भारतीय सनातन परंपरा में गुरु-शिष्य संबंध को अत्यंत पवित्र माना गया है और यही परंपरा समाज में नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाती है।
संत-महात्माओं ने अपने प्रवचनों में कहा कि वर्तमान समय में जब समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब गुरुजनों के उपदेश और संतों का मार्गदर्शन मानवता के लिए अत्यंत आवश्यक है। संतों ने सेवा, सत्संग, भक्ति और सदाचार को जीवन का आधार बताते हुए सभी श्रद्धालुओं को धर्म और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
स्थापना दिवस समारोह में महंत दुर्गादास महाराज, महंत प्रहलाद दास महाराज, महंत सूरज दास महाराज, महंत वीरेन्द्रानंद महाराज, महंत मोहन सिंह महाराज, महंत राघवेंद्र दास महाराज, महंत बिहारी शरण महाराज, महंत जयरामदास महाराज, महंत अंकित शरण महाराज, महंत नरेश आनंद महाराज, महंत सत्यव्रतानंद महाराज, स्वामी सुशील जी, कोतवाल कमल मुनि, कोतवाल श्याम गिरी, कोतवाल रामेश्वर गिरी महाराज सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में समाजसेवी एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता अनिरुद्ध भाटी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
पूरे आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन, सत्संग एवं गुरु महिमा के गुणगान से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त कर स्वयं को धन्य महसूस किया। अंत में सभी संत-महात्माओं के सानिध्य में विश्व शांति, राष्ट्र की उन्नति और मानव कल्याण के लिए प्रार्थना की गई तथा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

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