ममता चौहान
हरिद्वार। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर हरिपुर कला, गली नंबर-3 स्थित वैदिक सनातन धर्म मंदिर में ऋषि मेही आतीथेयम परंपरा की पावन प्रेरणा एवं परमहंस जी महाराज की असीम कृपा से निर्मित मेही परंपरा के नवीन भवन का भव्य लोकार्पण समारोह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम संस्थापक अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी व्यासानंद जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए संत-महात्माओं, विद्वानों तथा हजारों श्रद्धालु भक्तों ने सहभागिता कर समारोह को दिव्य स्वरूप प्रदान किया।
समारोह का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन एवं गुरु वंदना के साथ हुआ। इसके उपरांत पूज्य संतों का सम्मान किया गया तथा भजन-कीर्तन और सत्संग से संपूर्ण वातावरण भक्तिरस में सराबोर हो उठा। श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया और गुरु पूर्णिमा के महत्व को आत्मसात किया।
इस अवसर पर परम पूज्य स्वामी व्यासानंद जी महाराज ने अपने अमृतमयी उद्बोधन में कहा कि गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का वह महान पर्व है, जो गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता का प्रतीक है। गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। गुरु के मार्गदर्शन से ही मनुष्य का जीवन सफल, सार्थक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनता है।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल एक धार्मिक व्यवस्था नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का दिव्य जीवन-दर्शन है। संत समाज सदैव धर्म, संस्कृति, सेवा, करुणा, सदाचार और राष्ट्रहित की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करता आया है। संतों के आदर्शों को जीवन में अपनाकर ही व्यक्ति सच्चे सुख, शांति और आत्मिक उन्नति को प्राप्त कर सकता है।

स्वामी व्यासानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं, गुरु-भक्ति तथा आध्यात्मिक मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाएं। उन्होंने कहा कि गुरु का सान्निध्य मनुष्य को आत्मज्ञान, संयम, सेवा और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर करता है तथा समाज में प्रेम, सद्भाव और नैतिक मूल्यों की स्थापना करता है
कार्यक्रम में उपस्थित संत-महात्माओं ने भी गुरु-शिष्य परंपरा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भारत की आध्यात्मिक पहचान उसकी संत परंपरा है। ऋषि-मुनियों और संतों ने अपने तप, त्याग और ज्ञान के माध्यम से समाज को नई दिशा प्रदान की है। आज भी संत समाज मानवता को सत्य, प्रेम, सेवा और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
समारोह के दौरान श्रद्धालुओं ने नवीन भवन के लोकार्पण को मेही परंपरा के विस्तार और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। अंत में सभी श्रद्धालुओं ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर विश्व शांति, मानव कल्याण और सनातन संस्कृति की उन्नति के लिए प्रार्थना की। प्रसाद वितरण के साथ समारोह का श्रद्धापूर्वक समापन हुआ।
