. गोविंद बल्लभ पंत जी की जयंती पर परमार्थ निकेतन की भावपूर्ण श्रद्धांजलि

ममता चौहान मुख्य संपादक हरिद्वार उत्तराखंड ‘लोकमाता’ अहिल्याबाई होल्कर जी की पुण्यतिथि पर नमन* ऋषिकेश, 10 सितम्बर। भारत के महान…

हिमालय है तो हम हैं, हमारी संस्कृति, सभ्यता और सुरक्षा का आधार

*✨हिमालय, पृथ्वी का मौन उपनिषद्**💥स्वामी चिदानन्द सरस्वती*ऋषिकेश, 9 सितम्बर। हिमालय दिवस के अवसर पर परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती…

रुक्मणी विवाह प्रसंग से भक्तों को मिला भक्ति और संस्कार का संदेश

ममता चौहान हरिद्वार। उत्तरी हरिद्वार में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास रमेश जी भाई ने भगवान…

माँ गंगा के पावन तट पर सनातन चेतना, भक्ति और प्रेम से युक्त दिव्य कथा का शुभारम्भ

ममता चौहान गौवत्स श्री राधाकृष्ण जी पधारे परमार्थ निकेतन ऋषिकेश, 6 सितम्बर। परमार्थ निकेतन में गौवत्स श्री राधाकृष्ण जी के…

परमार्थ विद्या मन्दिर में धूमधाम से मनाया शिक्षक दिवस

ममता चौहान *✨गुरु के प्रति कृतज्ञता, संस्कारों के प्रति समर्पण और उज्ज्वल भविष्य का संकल्प**🌺शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी…

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर हरिद्वार जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने की मजिस्ट्रेटों की तैनाती, संवेदनशील स्थानों पर रहेगी विशेष निगरानी

ममता चौहान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर जनपद हरिद्वार में कानून-व्यवस्था के लिए व्यापक इंतजाम* *श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर हरिद्वार जनपद…

परमार्थ विद्या मन्दिर में मनायी जन्माष्टमी

ममता चौहान *✨परमार्थ विद्या मन्दिर के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने धूमधाम से मनाया श्री कृष्ण जन्म* ऋषिकेश, 3 सितम्बर। परमार्थ…

मसूरी गोलीकांड की बरसी पर उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के अमर बलिदानियों को परमार्थ निकेतन से भावपूर्ण श्रद्धांजलि

*💥शहीदों को समर्पित की आज की दिव्य गंगा आरती*ऋषिकेश, 2 सितंबर। मसूरी गोलीकांड की बरसी पर उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के…

*💥कजरी तीज – प्रकृति, नारी-शक्ति और शिव-पार्वती के दिव्य संगम का पर्व
*✨तीज, तप, प्रेम, संकल्प और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व*
ममता चौहान  संपादककजरी तीज – परंपरा से शक्ति, प्रकृति से प्रेम और शिव से जीवन का संतुलन*
*✨स्वामी चिदानन्द सरस्वती*
ऋषिकेश, 31 अगस्त। भारतीय संस्कृति में जीवन को धर्म, प्रकृति, परिवार और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने वाले जीवंत संस्कार हैं। हरियाली तीज – कजरी तीज, नारी-शक्ति, प्रकृति की हरितिमा, दाम्पत्य की मंगलकामना, तपस्या, श्रद्धा और भगवान शिव एवं माता पार्वती के दिव्य प्रेम का अद्भुत समन्वय है।
श्रावण मास की हरियाली, वर्षा की फुहारें और लोकगीतों की स्वर-लहरियाँ, इन सबके मध्य तीज का पर्व भारतीय जीवन-दर्शन का यह संदेश देता है कि प्रकृति और चेतना, शक्ति और शिव, प्रेम और तप, एक-दूसरे से अलग नहीं हैं।
सनातन परंपरा में माता पार्वती अखंड नारी-शक्ति, तप, श्रद्धा और संकल्प का प्रतीक हैं। तीज का आध्यात्मिक भाव इसी शिव-पार्वती तत्त्व से जुड़ता है, जहाँ शिव चेतना हैं और शक्ति उसकी क्रियाशील अभिव्यक्ति। शिव के बिना शक्ति निष्क्रिय है और शक्ति के बिना शिव भी पूर्ण अभिव्यक्ति में नहीं आते। इसीलिए तीज केवल दाम्पत्य-सुख की कामना का पर्व नहीं, बल्कि शिव और शक्ति के सनातन ऐक्य का उत्सव है।
हरियाली तीज विशेष रूप से सावन की हरितिमा और प्रकृति के नवजीवन का दिव्य प्रतीक है। वर्षा के आगमन के साथ जब धरती हरी चादर ओढ़ती है, वृक्षों पर नई कोंपलें आती हैं और वातावरण जीवन से भर उठता है, तब सनातन     संस्कृति प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि माता और जीवनदायिनी शक्ति के रूप में नमन करती है। इसलिए हरियाली तीज हमें यह स्मरण कराती है कि जिस प्रकृति की हरियाली हमारे जीवन में आनंद भरती है, उसकी रक्षा करना भी हमारा धर्म है।
परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने संदेश में कहा कि तीज का पर्व हमें भारतीय संस्कृति की उस महान दृष्टि से जोड़ता है जहाँ नारी पूजनीय है, प्रकृति वंदनीय है और परिवार साधना का क्षेत्र है। नारी केवल परिवार की आधारशिला नहीं, बल्कि संस्कार, करुणा, सृजन और शक्ति की जीवंत अभिव्यक्ति है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज तीज के अवसर पर हमें अपनी परंपराओं को केवल बाहरी उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि उनके आंतरिक संदेश के साथ जीने का संकल्प ले।
आज के युवा तीज को केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि अपने भीतर की शक्ति को जगाने, रिश्तों में सम्मान बढ़ाने और प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लेने के अवसर के रूप में मनाएँ। परंपरा से जुड़ें, प्रकृति से जुड़ें, संस्कारों से जुड़ें और अपने भीतर के शिव-तत्त्व को जगाएँ।
आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी तीज को केवल एक पारंपरिक उत्सव के रूप में न देखे, बल्कि समझे कि हमारी संस्कृति के प्रत्येक पर्व के पीछे जीवन को सुंदर, संतुलित, संयमित और करुणामय बनाने का संदेश छिपा है।
आइए, हरियाली तीज और कजरी तीज के पावन अवसर पर हम शिव में शांति, शक्ति में श्रद्धा, संबंधों में प्रेम और प्रकृति में परमात्मा का दर्शन करने का संकल्प लें।

परमार्थ निकेतन से ओणम के अवसर पर प्रकृति, अन्न और मानवता के सम्मान का संदेश

ममता चौहान ओणम, अन्नदाता के प्रति कृतज्ञता, समृद्ध भारतीय संस्कृति और सामाजिक समरसता का महापर्व ऋषिकेश, 26 अगस्त। भारत की…