( ममता चौहान) संवाददाता
हरिद्वार। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर हाईवे स्थित श्री त्रिपुरा मंदिर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। मंदिर में सुंदरकांड पाठ, गुरु पूजा एवं विशाल भंडारे का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर अपने गुरुदेव के चरणों में श्रद्धा अर्पित की तथा भगवान श्रीराम और श्रीहनुमान जी का स्मरण करते हुए धर्म लाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधि-विधान के साथ सुंदरकांड पाठ से हुआ। संपूर्ण मंदिर परिसर राम नाम और हनुमान जी के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ कर देश, समाज और विश्व के कल्याण की प्रार्थना की। इसके पश्चात गुरु पूजन का आयोजन हुआ, जिसमें भक्तों ने अपने गुरुदेव का पूजन-अर्चन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया तथा जीवन में ज्ञान, सदाचार, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की।
गुरु पूजा के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर परिसर में पूरे समय भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
इस अवसर पर श्री त्रिपुरा मंदिर के महाराज स्वामी संत मुनि जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु ही मनुष्य के जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का महान अवसर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से धर्म, सेवा और संस्कारों की परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया तथा आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी भक्तों और सेवाभाव से जुड़े लोगों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि श्री त्रिपुरा मंदिर केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है। मंदिर में समय-समय पर भजन संध्या, संगीतमय सत्संग, सुंदरकांड पाठ, धार्मिक प्रवचन, भक्ति संगीत कार्यक्रम तथा विभिन्न पर्वों पर विशेष आयोजन किए जाते हैं, जिनमें स्थानीय सहित दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से सनातन संस्कृति, भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक समरसता का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाता है।
गुरु पूर्णिमा के इस पावन आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि गुरु के मार्गदर्शन में ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य प्राप्त किया जा सकता है। श्रद्धा, सेवा, भक्ति और संस्कारों से ओत-प्रोत यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया।
