ममता चौहान (मुख्य संपादक) हरिद्वार उत्तराखंड
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार स्थित दशनाम आश्रम में श्री लटियाल माता सेवा समिति के तत्वावधान में 19 जून 2026 से 26 जून 2026 तक आयोजित श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ संपन्न हो रही है।

कथा के प्रथम दिवस महिलाओं द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
जोधपुर (राजस्थान) से पधारी पूज्या संत तारा देवी जी अपने श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का अमृतपान करा रही हैं। कथा में भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, धर्म, भक्ति, सेवा एवं मानव कल्याण के संदेशों का सुंदर वर्णन किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो रहे हैं। संत तारा देवी जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सत्य, प्रेम, करुणा और ईश्वर भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करने का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने बताया कि वे प्रतिवर्ष लगभग 24 श्रीमद्भागवत कथाओं का आयोजन देश के विभिन्न राज्यों में करती हैं तथा अपना संपूर्ण जीवन सनातन धर्म, आध्यात्मिक चेतना और जनसेवा के लिए समर्पित कर चुकी हैं। उनके प्रवचनों से श्रद्धालुओं में धर्म, संस्कृति और संस्कारों के प्रति नई जागृति उत्पन्न हो रही है।

कथा के यजमान जोधपुर से पधारे श्री नवरत्न दवे , जो पूरे श्रद्धाभाव से कथा आयोजन में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। आयोजन में, पूर्णा वोहरा ,इंद्रलाल माथुर, इन्दू माथुर सहित अनेक श्रद्धालु एवं भक्तजन उपस्थित होकर कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।
धर्मनगरी हरिद्वार को सनातन संस्कृति की आध्यात्मिक राजधानी माना जाता है। मां गंगा के पावन तट पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का विशेष महत्व है, क्योंकि यहां कथा श्रवण से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति, आत्मिक ऊर्जा और मोक्ष मार्ग की प्रेरणा प्राप्त होती है। सनातन धर्म में श्रीमद्भागवत कथा को कलियुग में भगवान की प्राप्ति का सरलतम साधन बताया गया है। कथा के माध्यम से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है तथा समाज में सद्भाव, सेवा और संस्कारों का विस्तार होता है।
पूरे आयोजन स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिकता का अद्भुत वातावरण बना हुआ है तथा प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण कर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन हो रहे हैं।॥🙏📿🕉️॥
