ममता चौहान मुख्य संपादक
हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष परम पूज्य श्रीमहंत रवींद्र पुरी जी महाराज ने संत समाज, श्रद्धालुओं एवं देश-विदेश के धर्मप्रेमियों से अपील करते हुए कहा है कि अखाड़ा परिषद को लेकर फैलाए जा रहे किसी भी प्रकार के भ्रामक प्रचार और अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि अखाड़ा परिषद पूरी तरह एकजुट है और आगामी महाकुंभ की तैयारियों में सभी अखाड़ों, संत-महात्माओं तथा संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करते हुए पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ जुटी हुई है।
श्रीमहंत रवींद्र पुरी जी महाराज ने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद केवल एक संगठन नहीं, बल्कि सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं, आध्यात्मिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत का प्रतिनिधित्व करने वाला सर्वोच्च मंच है। परिषद सदियों से संत समाज को एक सूत्र में बांधते हुए धर्म, राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए निरंतर कार्य करती आ रही है। ऐसे में कुछ स्वार्थी तत्व परिषद की गरिमा को ठेस पहुंचाने और संत समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न करने के उद्देश्य से निराधार एवं भ्रामक अफवाहें फैला रहे हैं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम पूरी तरह असत्य, निराधार और तथ्यों से परे है। परिषद के सभी सदस्य, संत एवं महंत पूरी एकजुटता के साथ संगठन के निर्णयों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद की सबसे बड़ी शक्ति उसकी एकता, अनुशासन, पारदर्शिता और सनातन धर्म के प्रति अटूट आस्था है, जिसे किसी भी प्रकार की अफवाह या दुष्प्रचार से कमजोर नहीं किया जा सकता।
श्रीमहंत रवींद्र पुरी जी महाराज ने कहा कि आगामी महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सनातन परंपरा का विश्वस्तरीय महापर्व है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस आयोजन को दिव्य, भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए अखाड़ा परिषद युद्धस्तर पर तैयारियों में जुटी हुई है। सभी अखाड़ों, संत-महात्माओं, प्रशासन एवं संबंधित विभागों के साथ लगातार संवाद और समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
उन्होंने कहा, “जो संत कल हमारे साथ थे, वे आज भी हमारे साथ हैं और आगे भी रहेंगे। हमारी शक्ति हमारी एकता, आपसी विश्वास और सनातन धर्म के प्रति समर्पण में निहित है। अखाड़ा परिषद किसी भी प्रकार की भ्रम फैलाने वाली मानसिकता पर विश्वास नहीं करती। हमारा उद्देश्य केवल धर्म, समाज और राष्ट्रहित में कार्य करना है।”
श्रीमहंत रवींद्र पुरी जी महाराज ने कहा कि संत समाज सदैव प्रेम, सद्भाव, सेवा, त्याग और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देता आया है। अखाड़ा परिषद का प्रत्येक निर्णय सनातन धर्म की गरिमा, संत समाज की प्रतिष्ठा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए लिया जाता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे केवल अधिकृत जानकारी पर ही विश्वास करें, किसी भी प्रकार की अफवाहों से दूर रहें तथा महाकुंभ को सफल बनाने में अपना सक्रिय सहयोग दें।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संत समाज की एकता, श्रद्धालुओं की आस्था और सभी के सामूहिक प्रयासों से आगामी महाकुंभ विश्व के सबसे भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक आयोजनों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा तथा सनातन धर्म की महान परंपरा का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचेगा।
