वेद निकेतन आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा अमृत धारा का दिव्य आयोजन, श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर


हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के भूपतवाला स्थित वेद निकेतन आश्रम में मोक्षदायनी मां गंगा भक्त सेवा समिति एवं जेएल कॉन्वेंट स्कूल, कासगंज (उत्तर प्रदेश) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा अमृत धारा का भव्य आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ जारी है। कथा में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु भक्तजन भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का श्रवण कर धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।


व्यासपीठ पर आसीन पूज्य श्री उमेश जी ओझा (बक्सर, बिहार) अपने श्रीमुख से श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथा का रसपान करा रहे हैं। उनकी ओजस्वी वाणी एवं भावपूर्ण कथा से श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर भगवान की भक्ति में लीन हो रहे हैं।
इस पावन आयोजन में कासगंज (उत्तर प्रदेश) से पधारे श्री दिनेश प्रताप सिंह एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती आरती सिंह, श्री कुलदीप गौतम, श्री विनोद कश्यप, श्री शिव सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित हैं। वहीं मथुरा से श्रीमती ज्योति, दिल्ली से श्रीमती वंदना वाजपेयी, श्रीमती किरण, श्रीमती पूजा, श्रीमती रजनी, श्री रविन्द्र देव चतुर्वेदी एवं श्री सत्यकृत गिरिधर भी कथा श्रवण हेतु पहुंचे हैं। आयोजन में हरिद्वार से श्री योगेश सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहकर कथा एवं धार्मिक कार्यक्रमों में सहयोग प्रदान कर रहे हैं।


कथावाचक पूज्य श्री उमेश जी ओझा ने कथा के माध्यम से बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का जीवंत दर्शन है। भागवत कथा मनुष्य को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का मार्ग दिखाती है तथा जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं मानव जीवन को प्रेम, करुणा, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।


उन्होंने हरिद्वार नगरी एवं मां गंगा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हरिद्वार देवभूमि उत्तराखंड का आध्यात्मिक प्रवेश द्वार है, जहां गंगा मां का पावन प्रवाह करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। शास्त्रों में मां गंगा को पापों का नाश करने वाली तथा जीवन को पवित्र बनाने वाली बताया गया है। हरिद्वार में किया गया स्नान, दान, जप, तप एवं सत्संग विशेष पुण्यदायी माना गया है।


कथा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म विश्व का सबसे प्राचीन एवं वैज्ञानिक जीवन दर्शन है, जो मानवता, प्रकृति संरक्षण, सेवा, सदाचार और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश देता है। वर्तमान समय में युवाओं को अपनी संस्कृति, परम्पराओं और धार्मिक मूल्यों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है, जिससे भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सके।
आयोजन स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर रहे हैं। पूरा वातावरण भजन-कीर्तन, जयघोष और आध्यात्मिक ऊर्जा से भक्तिमय बना हुआ है। श्रद्धालुओं ने आयोजन को धर्म और संस्कृति के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक सराहनीय पहल बताते हुए आयोजकों का आभार व्यक्त किया

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