हरिद्वार। दशनाम आश्रम में श्री लटियाल माता सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ जारी है। कथा के पांचवें दिवस पर जोधपुर (राजस्थान) से पधारी पूज्या संत तारा देवी जी ने अपने श्रीमुख से भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं एवं गोवर्धन लीला का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा का श्रवण कर श्रद्धालु भक्तिभाव में सराबोर हो गए।
भगवान कृष्ण के बाल लीलाएं
संत तारा देवी जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन का विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन को धर्म, प्रेम, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने पूतना वध, शकटासुर वध, तृणावर्त वध, माखन चोरी, यशोदा मैया को विराट स्वरूप दर्शन तथा कालिय नाग दमन जैसी लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान ने बाल्यकाल से ही अधर्म और अन्याय का नाश कर धर्म की स्थापना का संदेश दिया।
कथा के दौरान गोवर्धन लीला का वर्णन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। संत तारा देवी जी ने बताया कि जब इंद्रदेव के अहंकार के कारण ब्रज में मूसलाधार वर्षा होने लगी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर समस्त ब्रजवासियों, गौमाता और जीव-जंतुओं की रक्षा की। इस लीला के माध्यम से भगवान ने यह संदेश दिया कि अहंकार का अंत निश्चित है और सच्ची श्रद्धा एवं भक्ति ही जीवन का वास्तविक आधार है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को ईश्वर से जोड़ने का सबसे सरल और श्रेष्ठ माध्यम है। कथा श्रवण से मन को शांति, जीवन को नई दिशा तथा आत्मा को परम आनंद की अनुभूति होती है।
कथा के यजमान श्री नवरत्न दवे एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती राधा देवी श्रद्धापूर्वक कथा श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इस अवसर पर मुख्य रूप से श्रीमती पूर्णा बोहरा धर्मपत्नी श्री भवानी शंकर जी , बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तगण उपस्थित रहे। संपूर्ण आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण, भजन-कीर्तन और जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने कथा के उपरांत संत तारा देवी जी का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य बताया।
