हरिद्वार। भूपतवाला स्थित अग्रवाल भवन में उचाना कला के प्रतिष्ठित जियालाल गर्ग परिवार द्वारा पहली बार हरिद्वार की पावन भूमि पर श्रीमद्भागवत कथा का भव्य एवं दिव्य आयोजन श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ किया जा रहा है। यद्यपि गर्ग परिवार पूर्व में विभिन्न स्थानों पर धार्मिक आयोजनों एवं भागवत कथाओं का आयोजन कर चुका है, लेकिन देवभूमि हरिद्वार में यह उनका पहला कथा आयोजन है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आस्था देखने को मिल रही है।

कथा का शुभारंभ महिलाओं द्वारा निकाली गई भव्य कलश यात्रा से हुआ। कलश यात्रा सर्वानंद घाट से प्रारंभ होकर नगर भ्रमण करते हुए कथा स्थल अग्रवाल भवन पहुंची। सनातन परंपरा में कलश यात्रा को अत्यंत शुभ एवं मंगलकारी माना जाता है। कलश को सृष्टि, समृद्धि और दिव्य शक्ति का प्रतीक माना गया है। कथा प्रारंभ होने से पूर्व कलश यात्रा के माध्यम से क्षेत्र में धार्मिक वातावरण का निर्माण किया जाता है तथा भगवान और संतों का आह्वान किया जाता है। कथा स्थल पहुंचने के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच व्यास पीठ का पूजन कर श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ किया गया।
कथा व्यास पूज्य कुंज बिहारी दास जी भक्तमाली ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को ईश्वर से जोड़ने वाली दिव्य ज्ञानधारा है। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण, सत्संग और भागवत कथा का श्रवण ही मनुष्य के कल्याण का सर्वोत्तम साधन है। कथा व्यक्ति के भीतर भक्ति, विनम्रता, सेवा, करुणा और सदाचार के संस्कार विकसित करती है।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, भक्तों के प्रति उनके प्रेम और धर्म की स्थापना के लिए किए गए दिव्य कार्यों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा तथा श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा अमृत का रसपान करते रहे।
कथा व्यास ने कहा कि हरिद्वार में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह नगरी केवल एक तीर्थ नहीं बल्कि सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की राजधानी मानी जाती है। मां गंगा के पावन तट पर की गई पूजा-अर्चना, सत्संग, जप, तप और कथा श्रवण का फल अनेक गुना बढ़ जाता है। शास्त्रों में हरिद्वार को मोक्षदायिनी नगरी बताया गया है, जहां देवता, ऋषि-मुनि और संत-महात्मा सदैव धर्म साधना में लीन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मां गंगा के सान्निध्य में आयोजित भागवत कथा श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति प्रदान करती है तथा जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध कराती है। हरिद्वार में कथा श्रवण करना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति समर्पण और आत्मशुद्धि का एक दिव्य अवसर है। यही कारण है कि देशभर से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचकर कथा, सत्संग और गंगा दर्शन का लाभ प्राप्त करते हैं।
इस अवसर पर जियालाल गर्ग परिवार ने सभी श्रद्धालुओं के लिए उत्तम व्यवस्थाएं कीं तथा कथा में पहुंचने वाले भक्तों का स्वागत किया। कथा के उपरांत प्रसाद वितरण एवं भंडारे का आयोजन भी किया जा रहा है। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ विभिन्न राज्यों से आए भक्त भी कथा में सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं ने गर्ग परिवार के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का कार्य करते हैं। मां गंगा की पावन धारा और संतों के सान्निध्य में आयोजित यह श्रीमद्भागवत कथा इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।
