खड़खड़ी स्थित सर्वानंद घाट पर श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन, गंगा तट पर उमड़ रही श्रद्धालुओं की आस्था


हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के खड़खड़ी स्थित सर्वानंद घाट पर शिवागन एवं पाहुजा परिवार के सौजन्य से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हो रही है। पावन मां गंगा के तट पर आयोजित इस दिव्य कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथा का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। कथा स्थल पर भक्ति, साधना और भगवान श्रीकृष्ण के जयघोषों से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय बना हुआ है।


कथा व्यास ने अपने प्रवचनों में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, धर्म, प्रेम और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करने वाली दिव्य ज्ञानगंगा है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल एवं दिव्य लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के अंतःकरण को शुद्ध कर उसे आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। कथा के माध्यम से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का समन्वय स्थापित होता है तथा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।


उन्होंने कहा कि हरिद्वार जैसी पवित्र मोक्षदायिनी नगरी में मां गंगा के तट पर भागवत कथा का आयोजन विशेष पुण्यदायी माना गया है। गंगा के पावन तट पर कथा श्रवण करने से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति, आत्मिक संतोष तथा ईश्वर कृपा की अनुभूति होती है। सनातन परंपरा में हरिद्वार को देवताओं और ऋषि-मुनियों की तपोभूमि माना गया है, जहां किया गया सत्संग, जप, तप और कथा श्रवण अनेक गुना फलदायी माना जाता है।
कथा के दौरान पुरुषोत्तम मास की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। व्यास पीठ से बताया गया कि पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है। इस पवित्र मास में दान, पुण्य, जप, तप, गंगा स्नान और श्रीमद्भागवत कथा श्रवण का विशेष महत्व बताया गया है। पुरुषोत्तम मास में किए गए धार्मिक कार्यों से मनुष्य को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है तथा उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है।


शिवागन एवं पाहुजा परिवार ने कहा कि इस कथा आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना, संस्कार, सद्भावना और नैतिक मूल्यों को मजबूत करना है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कहा कि धार्मिक आयोजनों से परिवार, समाज और राष्ट्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।
कथा के दौरान भजन-कीर्तन, हरिनाम संकीर्तन एवं भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से संपूर्ण वातावरण भक्तिरस में डूबा रहा। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, पितरों की शांति, समाज में सौहार्द तथा विश्व कल्याण की मंगलकामना की। धार्मिक आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत यह आयोजन इन दिनों हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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