मां गंगा के पावन तट पर श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव, पुरुषोत्तम मास में उमड़ रही श्रद्धालुओं की आस्था


हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के श्रवणनाथ नगर स्थित मुल्तान भवन में जयपुर से पधारे श्रीमती सरोज देवी शर्मा, श्री मनोज शर्मा-पूनम शर्मा, श्री दीपक शर्मा-मीनाक्षी शर्मा एवं समस्त शर्मा परिवार के सौजन्य से 8 जून से 15 जून 2026 तक श्रीमद्भागवत कथा का भव्य एवं दिव्य आयोजन किया जा रहा है। मां गंगा के पावन तट पर आयोजित इस आध्यात्मिक महोत्सव में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा अमृत का रसपान कर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।


कथा का शुभारंभ महिलाओं द्वारा निकाली गई भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। कलश यात्रा हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी मां माया देवी मंदिर से प्रारंभ होकर बिरला घाट होते हुए मुल्तान भवन पहुंची। वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और भगवान के जयघोषों के बीच निकली इस यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। इसके पश्चात भागवत महात्म्य, सूत-शौनक संवाद एवं श्रीमद्भागवत के अवतरण प्रसंग के साथ कथा का शुभारंभ हुआ।
मुल्तान भवन में पहली बार श्रीधाम वृंदावन से पधारे पूज्य श्री कौन्तेय जी महाराज के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महाराज श्री की मधुर वाणी से प्रवाहित हो रही कथा गंगा का श्रद्धालु भाव-विभोर होकर श्रवण कर रहे हैं। सात दिवसीय कथा में ध्रुव चरित्र, जड़ भरत कथा, भक्त प्रह्लाद चरित्र, वामन अवतार, श्रीराम कथा, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, बाल लीलाएं, द्वारका लीला, रुक्मिणी विवाह, सुदामा चरित्र सहित अनेक प्रेरणादायी प्रसंगों का वर्णन किया जा रहा है।


कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण सनातन धर्म का ऐसा दिव्य ग्रंथ है जो मनुष्य को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का मार्ग दिखाता है। भागवत कथा का श्रवण करने से मन की चंचलता दूर होती है, जीवन में सकारात्मकता आती है और व्यक्ति भगवान के प्रति समर्पण भाव को प्राप्त करता है। कलियुग में कथा श्रवण को मोक्ष प्राप्ति का सरल और श्रेष्ठ साधन माना गया है।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार में भागवत कथा का महत्व विशेष रूप से बढ़ जाता है, क्योंकि यह नगरी देवताओं, ऋषि-मुनियों और संत-महात्माओं की तपोभूमि रही है। मां गंगा के पावन तट पर कथा श्रवण, जप, तप, दान और पूजा-अर्चना करने से आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है। हरिद्वार को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहां किया गया प्रत्येक धार्मिक कार्य श्रद्धालु के जीवन में आत्मिक शांति और ईश्वर कृपा का माध्यम बनता है।
कथा के दौरान पुरुषोत्तम मास की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। महाराज श्री ने बताया कि पुरुषोत्तम मास भगवान श्रीहरि विष्णु और श्रीकृष्ण को समर्पित अत्यंत पवित्र मास माना गया है। इस मास में गंगा स्नान, भगवान विष्णु का पूजन, श्रीमद्भागवत कथा श्रवण, तुलसी सेवा, दान-पुण्य, जप-तप और सत्संग का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में किए गए धार्मिक अनुष्ठान और पुण्य कर्मों का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है तथा व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
महाराज श्री ने कहा कि मां गंगा के तट पर पुरुषोत्तम मास में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धालुओं के लिए दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर है। कथा, गंगा और भगवान के नाम का संगम मनुष्य के जीवन को पवित्र बनाता है तथा उसे धर्म और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
कथा स्थल पर प्रतिदिन भजन-कीर्तन, हरिनाम संकीर्तन और भगवान श्रीकृष्ण के जयघोषों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। श्रद्धालु कथा श्रवण कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, पितरों की शांति, समाज में सद्भावना और विश्व कल्याण की मंगलकामना कर रहे हैं। मां गंगा के पावन सान्निध्य में आयोजित यह श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना

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