नव भारतीय किसान संगठन ने राष्ट्रपति को किसानों, मजदूरों और आमजन के अधिकारों की रक्षा हेतु सौंपा गया ज्ञापन

हरिद्वार। नव भारतीय किसान संगठन द्वारा हरिद्वार में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय महापंचायत के समापन अवसर पर किसानों, मजदूरों, महिलाओं, दिव्यांगजनों एवं आम नागरिकों के आर्थिक, सामाजिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक मांगों से संबंधित ज्ञापन भारत के राष्ट्रपति के नाम सिटी मजिस्ट्रेट हरिद्वार को सौंपा गया। संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती निर्मला शुक्ला के नेतृत्व में 9 जून से 11 जून 2026 तक आयोजित महापंचायत में देशभर से आए प्रतिनिधियों ने विभिन्न जनहितकारी मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।


ज्ञापन में कृषि को औद्योगिक दर्जा देने, किसानों के समस्त ऋण समाप्त करने तथा संवैधानिक दर्जा प्राप्त किसान आयोग के गठन की मांग की गई। शिक्षा सुधार के अंतर्गत पूरे देश में एक बोर्ड एवं एक समान पाठ्यक्रम लागू करने का सुझाव दिया गया। स्वास्थ्य क्षेत्र में ओपीडी एवं डायग्नोस्टिक जांचों को आयुष्मान योजना में शामिल करने तथा गंभीर बीमारियों के उपचार हेतु आर्थिक सीमा समाप्त करने की मांग रखी गई।


संगठन ने छोटी एवं सीमांत जोत वाले किसानों के लिए विशेष आर्थिक संरक्षण, न्यूनतम आय गारंटी तथा ग्रामीण घरेलू बिजली को जीवन उपयोगी सेवा घोषित कर निशुल्क उपलब्ध कराने की मांग की। भूमि अधिग्रहण मामलों में किसानों को सर्किल रेट का कम से कम छह गुना मुआवजा देने तथा राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेस-वे, राज्य मार्ग एवं रेलवे परियोजनाओं के लिए ग्राम सभा की स्वीकृति अनिवार्य करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
रोजगार एवं श्रमिक अधिकारों के अंतर्गत मनरेगा मजदूरी ₹700 प्रतिदिन तथा निजी क्षेत्र में न्यूनतम ₹1500 प्रतिदिन मजदूरी का कानून बनाने की मांग की गई। परीक्षा एवं कर सुधारों के तहत परीक्षा शुल्क, आवेदन शुल्क एवं डाक खर्च समाप्त करने, सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता तथा परीक्षार्थियों के लिए निशुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया।
कृषि इनपुट एवं बीज नीति में किसानों को मिलने वाली सब्सिडी सीधे उनके खातों में भेजने तथा बीज क्षेत्र में बड़ी कंपनियों के एकाधिकार को समाप्त करने की मांग उठाई गई। कृषि अनुसंधान और तकनीकी विकास के लिए तहसील स्तर पर कृषि विज्ञान केंद्र एवं ब्लॉक स्तर पर वितरण एवं संग्रहण प्रणाली विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया।


गन्ना किसानों के हित में गन्ना छिलाई, ढुलाई एवं भुगतान व्यवस्था को लेकर स्पष्ट नीति बनाने, समय पर भुगतान न होने पर ब्याज सहित राशि देने तथा गन्ना मूल्य की समयबद्ध घोषणा करने की मांग की गई। लोकतांत्रिक सुधारों के तहत सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराने का सुझाव दिया गया ताकि चुनाव प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
महिला सशक्तिकरण के लिए महिलाओं को सभी क्षेत्रों में समान भागीदारी प्रदान करने, दिव्यांगजनों के अधिकारों की सुरक्षा हेतु दिव्यांग आयोग के गठन तथा विधवा एवं वृद्धावस्था पेंशन को बढ़ाकर ₹5000 प्रतिमाह करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि ₹6000 से बढ़ाकर ₹12000 वार्षिक करने का सुझाव दिया गया।
नव भारतीय किसान संगठन ने कहा कि ये सभी मांगें भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निहित सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की भावना के अनुरूप हैं। ज्ञापन की एक प्रति भारत सरकार के प्रधानमंत्री को भी प्रेषित की गई है। संगठन ने आशा व्यक्त की कि किसानों, मजदूरों एवं आम नागरिकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार इन मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करेगी। :::

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