वेद निकेतन धाम में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ, कलश यात्रा में उमड़ी श्रद्धा


हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार स्थित वेद निकेतन धाम में गुजरात के अहमदाबाद से पधारे प्रवीण भाई साथिया, वीना बहन साथिया (यूएसए) एवं समस्त माली परिवार साथिया पालीटाना के सौजन्य से सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य एवं दिव्य शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। यह कथा 10 जून 2026 से प्रारंभ होकर सात दिनों तक चलेगी, जिसमें श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं एवं श्रीमद्भागवत महापुराण के अमृतमय प्रसंगों का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करेंगे।


कथा के शुभारंभ अवसर पर महिलाओं ने श्री स्वामीनारायण घाट से भव्य कलश यात्रा निकाली। पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर भजन-कीर्तन और भगवान के जयघोष के साथ वेद निकेतन धाम तक यात्रा निकाली। पूरे मार्ग में भक्तिमय वातावरण बना रहा तथा श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया। वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ कथा का शुभारंभ किया गया।


इस अवसर पर श्रीमती हिरल साथिया (यूएसए) ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हरिद्वार की पावन भूमि पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन करना उनके परिवार के लिए अत्यंत सौभाग्य और ईश्वर की विशेष कृपा का विषय है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली आध्यात्मिक शिक्षा है। कथा मनुष्य को सत्य, प्रेम, सेवा, भक्ति और सदाचार का संदेश देती है तथा ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करती है।


कथा के दौरान श्रद्धालुओं को भागवत महापुराण का रसपान भावनगर (गुजरात) से पधारे विद्वान कथाव्यास श्री हरदेव उपाध्याय जोशी जी के मुखारविंद से प्राप्त होगा। वे सात दिनों तक भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, भक्त चरित्रों, धर्म, ज्ञान, वैराग्य एवं भक्ति के गूढ़ रहस्यों का सरल एवं प्रेरणादायक वर्णन करेंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलश यात्रा किसी भी धार्मिक आयोजन के शुभारंभ का मंगल प्रतीक मानी जाती है। कलश में जल, आम्र पल्लव और नारियल स्थापित कर उसे देव शक्तियों का प्रतीक माना जाता है। कलश यात्रा का उद्देश्य वातावरण को पवित्र बनाना, समाज में धार्मिक चेतना जागृत करना तथा आयोजन स्थल तक दिव्य ऊर्जा और सकारात्मक भावों का संचार करना होता है। यह यात्रा श्रद्धा, एकता और सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का भी प्रतीक है।


श्रीमद्भागवत कथा का मूल उद्देश्य मानव जीवन को धर्म, भक्ति, ज्ञान और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करना है। भागवत महापुराण में भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि जीवन में ईश्वर भक्ति, करुणा, सेवा, परोपकार और सदाचार का कितना महत्व है। कथा श्रवण से मन की अशांति दूर होती है, आध्यात्मिक जागृति आती है तथा व्यक्ति के भीतर सकारात्मक चिंतन और संस्कारों का विकास होता है।


यह आयोजन पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर किया जा रहा है, जिसे सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस मास में भगवान विष्णु एवं श्रीकृष्ण की आराधना, जप, तप, दान, व्रत, सत्संग और भागवत कथा श्रवण का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में श्रद्धापूर्वक किए गए धार्मिक कार्यों का फल सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक प्राप्त होता है। इससे व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
वेद निकेतन धाम में आयोजित इस सात दिवसीय कथा महोत्सव में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा अमृत का रसपान करेंगे। आयोजन स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है तथा श्रद्धालु भगवान के नाम संकीर्तन और कथा श्रवण के माध्यम से अपने जीवन को धर्ममय बनाने का संकल्प ले रहे हैं

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