हर-हर महादेव और जय मां गंगे के जयघोष से शिवमय हुई धर्मनगरी, आस्था के साथ राष्ट्रभावना और खेल संस्कृति का संदेश
हरिद्वार। सावन के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में हर की पैड़ी से सनातन संस्कृति, शिवभक्ति और राष्ट्रभावना का संदेश गूंजा। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के संतों के सानिध्य में उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या ने कांवड़ उठाकर भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था प्रकट की। इस दौरान हर की पैड़ी का वातावरण हर-हर महादेव और जय मां गंगे के जयघोष से गुंजायमान रहा। संत-महात्माओं, कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने आयोजन को भव्य एवं आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज तथा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत राजेंद्र गिरी महाराज सहित संत समाज के प्रमुख संतों की मौजूदगी में कांवड़ यात्रा का शुभारंभ हुआ। मंत्री रेखा आर्या ने कांवड़ उठाकर भगवान महादेव के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त किया। इस अवसर पर उन्होंने देश की सुख-समृद्धि, शांति, प्रगति और सनातन संस्कृति की मजबूती की कामना की।
कांवड़ यात्रा के दौरान संतों और श्रद्धालुओं ने लगातार हर-हर महादेव तथा जय मां गंगे के जयकारे लगाए। भगवा वस्त्रों में संतों की मौजूदगी, धर्मध्वजाओं और कांवड़ के साथ आगे बढ़ते शिवभक्तों ने हर की पैड़ी की आध्यात्मिक छटा को और भव्य बना दिया। गंगा तट पर मौजूद श्रद्धालुओं में भी आयोजन को लेकर उत्साह दिखाई दिया।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल गंगाजल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करने की परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, तप, त्याग और समर्पण का प्रतीक है। सनातन धर्म की यह महान परंपरा समाज को धर्म, संस्कार, सेवा और एकता का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार की पावन धरती से गंगाजल लेकर देश के कोने-कोने से शिवभक्त अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करते हैं। इस यात्रा में क्षेत्र, भाषा और सामाजिक भेदभाव समाप्त होकर सभी शिवभक्ति के एक सूत्र में बंध जाते हैं। यही सनातन संस्कृति की शक्ति और विशेषता है।
आस्था के साथ खेल और राष्ट्रभावना को जोड़ने का प्रयास

मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि कांवड़ यात्रा भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी है। हरिद्वार से निकलने वाली शिवभक्ति की यह ऊर्जा पूरे देश में सकारात्मक संदेश पहुंचाती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को धर्म और संस्कृति से जोड़ने के साथ उनमें अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रभावना की भावना मजबूत करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि खेल, आस्था और राष्ट्रभावना को एक साथ जोड़कर युवाओं को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। भगवान शिव से देश की उन्नति, प्रदेश की खुशहाली और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्होंने कहा कि सनातन परंपराएं समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं।
जयघोष से शिवमय हुआ हर की पैड़ी का वातावरण
कांवड़ यात्रा के दौरान हर की पैड़ी और आसपास का क्षेत्र हर-हर महादेव तथा जय मां गंगे के जयघोष से गूंजता रहा। संतों ने कांवड़ियों का उत्साह बढ़ाया और श्रद्धालुओं ने भी पूरे भक्तिभाव के साथ आयोजन में सहभागिता की। गंगा तट पर संत समाज की उपस्थिति और शिवभक्तों की आस्था ने माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
संतों ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, साधना, संस्कार, मानव कल्याण और सामाजिक एकता की जीवन पद्धति है। हरिद्वार की पावन धरती से कांवड़ यात्रा के माध्यम से इसी सनातन परंपरा का संदेश देशभर में पहुंच रहा है।
हर-हर महादेव और जय मां गंगे के जयघोष के बीच हर की पैड़ी से निकला यह आयोजन शिवभक्ति के साथ सनातन गौरव, सामाजिक एकता, सेवा और राष्ट्रभावना का संदेश देता नजर आया।
