रानी पीपल गली स्थित श्री राम कृपा धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा-भक्ति के साथ संपन्न

संवाददाता( ममता चौहान)

गुरु जीवन को सही दिशा देते हैं, कांवड़ यात्रा सेवा, संयम और श्रद्धा का पर्व है : साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी

हरिद्वार। भूपतवाला की रानी पीपल गली स्थित श्री राम कृपा धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। महोत्सव के अवसर पर गुरु पूजन का दिव्य आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपने पूज्य गुरुदेव का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे आश्रम परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और गुरु महिमा के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।


कार्यक्रम में संत-महात्माओं का सम्मान किया गया तथा उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु की महिमा का गुणगान करते हुए भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु की सर्वोच्च भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर परम पूज्या साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी जी ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु ही मनुष्य के जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु के सान्निध्य में ही व्यक्ति का आत्मिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास संभव होता है। उन्होंने कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा प्रदान कर आत्मकल्याण का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। इसलिए भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है।


साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी जी ने वर्तमान में चल रही पावन श्रावण कांवड़ यात्रा के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर अपने आराध्य भगवान शिव का अभिषेक करने निकलने वाले कांवड़िए अत्यंत पुण्य के भागी होते हैं। कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अनुशासन, सेवा, संयम, त्याग और श्रद्धा का अनुपम पर्व है। उन्होंने सभी कांवड़ यात्रियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे सुरक्षित एवं कुशलतापूर्वक गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करें।


उन्होंने संदेश देते हुए कहा कि भगवान भोलेनाथ श्रद्धा और निष्कपट भक्ति से प्रसन्न होते हैं। शिव को प्रसन्न करने के लिए अत्यधिक मात्रा में गंगाजल ले जाने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि वे तो चुल्लू भर गंगाजल से भी भक्त की सच्ची भावना स्वीकार कर लेते हैं। इसलिए कांवड़ यात्रा के दौरान आवश्यकता से अधिक भार लेकर स्वयं को कष्ट न दें और न ही ऐसा कोई कार्य करें जिससे अन्य लोगों को असुविधा हो।


साध्वी जी ने कांवड़ यात्रियों से अपील की कि यात्रा के दौरान मर्यादा, अनुशासन और सद्भाव बनाए रखें। तेज आवाज में डीजे बजाने, नशे का सेवन करने, हुड़दंग या उत्पात मचाने जैसी गतिविधियों से दूर रहें तथा मार्ग में आमजन की सुविधा का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति वही है, जिसमें स्वयं के साथ-साथ दूसरों के सुख, शांति और सुविधा का भी ध्यान रखा जाए। सेवा, विनम्रता और संयम के साथ संपन्न की गई कांवड़ यात्रा ही भगवान शिव की वास्तविक आराधना है।


कार्यक्रम के समापन पर संत-महात्माओं एवं हजारों श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। पूरे आयोजन के दौरान श्री राम कृपा धाम भक्तिमय वातावरण, भजन-कीर्तन और गुरु वंदना से गुंजायमान रहा तथा श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा महोत्सव को अत्यंत हर्षोल्लास एवं आध्यात्मिक भावनाओं के साथ मनाया

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