ममता चौहान
हरिद्वार, 15 जुलाई (संवाददाता)।
मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए पुजारियों एवं कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले विशेष कुर्ते अनिवार्य कर दिए हैं। बुधवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने मंदिर परिसर में पुजारियों और कर्मचारियों को ये विशेष कुर्ते वितरित किए।
श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने बताया कि कुछ दिन पहले इस व्यवस्था की घोषणा की गई थी, जिसे अब प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब मंदिर में सेवा देने वाले सभी पुजारी और कर्मचारी बिना जेब वाले कुर्ते पहनकर ही अपनी ड्यूटी करेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य चढ़ावे को लेकर किसी भी प्रकार की शंका, अनियमितता या चोरी की आशंका को समाप्त करना तथा श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत करना है।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में देश के कुछ प्रमुख मंदिरों में चढ़ावे से जुड़ी घटनाओं के बाद मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। ऐसे में मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर की गरिमा बनाए रखने और श्रद्धालुओं की आस्था को सर्वोपरि मानते हुए यह अभिनव निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि कई बार चोरी जैसी घटनाओं में छोटे कर्मचारियों पर आरोप लग जाते हैं, जबकि वास्तविक स्थिति कुछ और होती है। इसलिए ऐसी व्यवस्था बनाई गई है, जिससे किसी भी प्रकार के संदेह की कोई गुंजाइश न रहे।
श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने स्पष्ट किया कि यदि कोई पुजारी या कर्मचारी चोरी अथवा किसी भी प्रकार की अनियमितता करते हुए पाया जाता है तो उसके विरुद्ध सीधे कानूनी कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। ट्रस्ट का उद्देश्य मंदिर की प्रत्येक व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
इस पहल का श्रद्धालुओं ने भी खुलकर स्वागत किया। मंदिर पहुंचे भक्तों ने कहा कि ट्रस्ट का यह निर्णय मंदिर प्रशासन की ईमानदारी और पारदर्शिता का परिचायक है। उनका मानना है कि इससे श्रद्धालुओं का मंदिर प्रबंधन पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
इंदौर से दर्शन के लिए आए श्रद्धालु प्रमोद कुमार दुबे ने बताया कि उन्होंने देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन किए हैं, लेकिन इस प्रकार की व्यवस्था पहली बार देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि यह पहल अनुकरणीय है और देश के अन्य बड़े धार्मिक स्थलों पर भी इसे लागू किया जाना चाहिए, ताकि चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर किसी प्रकार की शंका न रहे तथा धार्मिक संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो
