कुंभ मेले में ऐसे लोगों के प्रवेश पर लगे रोक, संत समाज की गरिमा से नहीं होगा खिलवाड़ : श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज

संवाददाता ममता चौहान


श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन (निर्वाण) अखाड़े के मुखिया श्रीमहंत भक्त रामदास महाराज ने स्वयं को नया उदासीन अखाड़े का महत्वपूर्ण संत बताने वाले गणेश दास के दावों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्हें पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि असली गणेश दास उनके साथ हैं, जबकि जो व्यक्ति स्वयं को गणेश दास बताकर प्रचार-प्रसार कर रहा है, उसका वास्तविक नाम कश्मीर सिंह है। वह नकली पहचान बनाकर संत समाज और श्रद्धालुओं को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है।
श्रीमहंत भक्त रामदास महाराज ने कहा कि जो व्यक्ति स्वयं वास्तविक पहचान छिपाकर लोगों को गुमराह कर रहा है, वही दूसरों को नकली बताने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने गणेश दास द्वारा अपने पास “असली देवता” होने के दावे को भी सिरे से खारिज करते हुए कहा कि देवता किसी आयोजन, अष्टमी या दावे से स्थापित नहीं होते, बल्कि वे श्रद्धा, आस्था और सनातन परंपरा का विषय हैं। ऐसे दावों से केवल लोगों की धार्मिक भावनाओं को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अखाड़ा किसी एक राज्य या क्षेत्र विशेष का नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष के संत समाज का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को झूठे प्रचार और भ्रामक दावों के माध्यम से संत समाज को बांटने अथवा अखाड़ों की गरिमा को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं है। संत समाज हमेशा एकजुट रहा है और भविष्य में भी एकजुट रहेगा।
श्रीमहंत भक्त रामदास महाराज ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा कि आगामी कुंभ मेले में ऐसे लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए, जो भगवा वस्त्र धारण कर संत समाज की छवि धूमिल करने और वातावरण को अशांत करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, जिससे कुंभ का आयोजन दिव्य, भव्य एवं शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सके।
वहीं, श्री पंचायती अखाड़ा महा निर्वाणी के सचिव एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने भी हाल ही में निरंजनी अखाड़े के सचिव द्वारा किए गए व्यक्तिगत आक्षेपों को अनुचित बताते हुए कहा कि संत समाज की परंपरा व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप की नहीं है। उन्होंने कहा कि वे किसी भी व्यक्ति पर व्यक्तिगत टिप्पणी करने में विश्वास नहीं रखते और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि सभी को सद्बुद्धि प्रदान करें, जिससे संत समाज की मर्यादा और सम्मान अक्षुण्ण बना रहे।
इस अवसर पर पंजाब के विभिन्न डेरों से आए संत, महंत, महामंडलेश्वर तथा विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने भी संत समाज की एकता बनाए रखने पर बल दिया। कार्यक्रम में महंत रघुवीर दास महाराज सहित सुदर्शन आश्रम अखाड़ा के संत एवं अनेक गणमान्य संत-महात्मा मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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