हरिद्वार: संतों का संग समाज का उत्थान अखिल भारतीय संत परिषद


हरिद्वार :शांभवी धाम भूपत वाला  मे आज 16 मई 2026 को एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया जिसमे परिषद के संस्थापक और शांभवी धाम के पीठाधीश्वर  पूज्य स्वामी आनंद स्वरूप जी महाराज ने सनातन धर्म, संत परंपरा, वेद मर्यादा और भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति की रक्षा के उद्देश्य से अखिल भारतीय संत परिषद की स्थापना की औपचारिक उद्घोषणा की ।उन्होंने कहा धर्म की मर्यादा निरंतर घट रही है, सनातन परंपराओं पर आघात हो रहे हैं, किंतु धर्म रक्षा हेतु मुखर होकर खड़े होने वाली संस्थाएं दुर्लभ होती जा रही है। आज संतों पर हो रहे अन्याय, सनातन परंपराओं के क्षरण और अशास्त्रीय और अवैदिक अखाड़ो के निर्माण और अयोग्य व्यक्तियों द्वारा सन्यास परंपरा में प्रवेश जैसी गंभीर समस्याएं देखने को मिल रही है सत्ता के दबाव में अधिकांश संस्थाएं मौन है यह स्थिति संत समाज की ही नहीं बल्कि संपूर्ण सनातन धर्म के लिए घातक हो सकती है। इन सभी समस्याओं के निदान के लिए अखिल भारतीय संत परिषद की स्थापना की उद्घोषणा की  गई। जिसमें 11 संस्थापक सदस्य उपस्थित रहे और उनकी सहमति और संकल्प से इस परिषद की स्थापना की घोषणा करी गई। सभा में सभी संतो ने संकल्प लिया कि वह संत समाज को राजनीतिक से मुक्त कर धर्म पर आधारित और आत्म सम्मान एवं स्वतंत्र स्वर प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि इस परिषद के उद्देश्य होंगे संत समाज की गरिमा, मर्यादा को बनाए रखना वेद और शास्त्र सम्मत संत परंपरा का संवर्धन करना तथा संतों पर हो रहे अन्याय के विरुद्ध एकजुट होकर स्वर बनना एवं समाज में धर्म पर आधारित नैतिक जागरण का निर्माण करना और संतों की स्वतंत्रता की रक्षा करना।

इन्हीं उद्देश्यों को लेकर  अखिल भारतीय संत परिषद अपना कार्य धर्म के हित में करेगा तथा धर्म और आध्यात्मिक जगत को सर्वोच्च करेगा।  संस्थापक सदस्यों में स्वामी अच्युतानंद तीर्थ जी महाराज, स्वामी सोमेश्वरानंद गिरी जी, स्वामी आनंद स्वरूप महाराज जी, विनोद महाराज जी, वेद प्रकाशाचार्य महाराज जी ,प्रणब दास जी महाराज, सौरभ कृष्णा ब्रह्मचारी, स्वामी चरणाश्रित गिरी महाराज, कार्तिक गिरी महाराज ,केशवानंद गिरी महाराज और कृष्णानंद गिरी महाराज उपस्थित रहे।

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