श्री अखंड विशम्भरानंद आश्रम में गुरु पूजा महोत्सव व ब्रह्मलीन स्वामी वेदानंद महाराज की पुण्यतिथि भव्य और दिव्य रूप में मनाई गई

गुरु ही जीवन को अज्ञान से ज्ञान और संस्कार की ओर ले जाने वाले दिव्य पथप्रदर्शक : महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज

हरिद्वार। उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला स्थित श्री अखंड विशम्भरानंद आश्रम में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 स्वामी वेदानंद महाराज की अष्टम पुण्यतिथि एवं गुरु पूजा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। महोत्सव के सफल आयोजन को लेकर आश्रम में व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। देशभर से संत-महात्माओं, महामंडलेश्वरों एवं हजारों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए आयोजन को भव्य स्वरूप दिया जा रहा है।


आश्रम के परमाध्यक्ष एवं महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज ने बताया कि 27 जुलाई से संत-महात्माओं का आगमन प्रारंभ होगा। 28 जुलाई को आश्रम में श्रीरामायण जी के पाठ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागी बनेंगे। 29 जुलाई को गुरु पूजा महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गुरु पूजन, ब्रह्मलीन गुरुदेव को श्रद्धांजलि, संत-महात्माओं का सम्मान एवं आशीर्वचन का आयोजन होगा। इसके पश्चात विशाल भंडारे में संतों एवं श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा।


स्वामी केशवानंद महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है। गुरु ही मनुष्य के जीवन से अज्ञान, भ्रम और नकारात्मकता का नाश कर उसे ज्ञान, विवेक, संस्कार और आत्मबोध का मार्ग दिखाते हैं। गुरु के सानिध्य में ही व्यक्ति का चरित्र निर्माण होता है और वह धर्म तथा मानवता के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा प्राप्त करता है। गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और समर्पण व्यक्त करने का दिव्य अवसर है।


उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी वेदानंद महाराज ने अपना संपूर्ण जीवन धर्म, अध्यात्म, सेवा, तप एवं संत परंपरा के संरक्षण के लिए समर्पित किया। उनका तपस्वी जीवन आज भी संत समाज और श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित यह महोत्सव उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।


महामंडलेश्वर ने कहा कि संतों का सानिध्य व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है तथा समाज में प्रेम, सद्भाव, सेवा और संस्कारों को सुदृढ़ बनाता है। आज के समय में भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा के मूल्यों को आत्मसात करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे गुरु पूजा महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर संत-महात्माओं का आशीर्वाद प्राप्त करें तथा धार्मिक आयोजनों में सहभागिता कर अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित करें।


आश्रम प्रशासन के अनुसार महोत्सव के दौरान संपूर्ण आश्रम परिसर को आकर्षक रूप से सजाया जाएगा। भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठानों और संतों के सान्निध्य से पूरा वातावरण भक्तिमय रहेगा तथा श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।

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