हरिद्वार, भूपतवाला। धर्मनगरी हरिद्वार की पावन भूमि पर स्थित वासुदेव आश्रम, भूपतवाला में जिला व्यारा (गुजरात) निवासी श्रीमती रूपल परेश पटेल द्वारा अपने मायके एवं ससुराल पक्ष के पितरों की सद्गति और मोक्ष की कामना से श्रीमद्भागवत कथा का भव्य एवं दिव्य आयोजन कराया जा रहा है। श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के मध्य आयोजित इस कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेकर कथा अमृत का रसपान कर रहे हैं।

बताया गया कि श्रीमती रूपल परेश पटेल द्वारा यह श्रीमद्भागवत कथा पहली बार आयोजित कराई जा रही है। कथा आयोजन को लेकर उनके परिवार और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। इस पुण्य अवसर पर उनके साथ उनके अंकल श्री राजू पटेल, आंटी श्रीमती मीना पटेल, गुजरात से आए पंडित श्री अक्षय जी, जीगेस राणा, शैलेश चोहान, देवांग गामी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित हैं। कथा में लगभग 150 श्रद्धालु गुजरात से हरिद्वार पहुंचे हैं, जो इस आध्यात्मिक आयोजन के साक्षी बन रहे हैं।
कथा व्यास पीठ पर विराजमान श्री प्रणव बापू पांडया अपने श्रीमुख से श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथा का श्रवण करा रहे हैं। कथा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और मानव जीवन के आध्यात्मिक मूल्यों का विस्तार से वर्णन किया जा रहा है। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा श्रवण कर रहे हैं तथा भगवान के नाम-स्मरण और भजन-कीर्तन में सहभागी बन रहे हैं।
पुरुषोत्तम मास का विशेष महत्व
सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) को अत्यंत पुण्यदायी और भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस मास में किए गए जप, तप, दान, व्रत, कथा श्रवण और भगवान की आराधना का फल सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक प्राप्त होता है। यह मास आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर माना जाता है। इसलिए अनेक श्रद्धालु इस काल में धार्मिक अनुष्ठान, भागवत कथा और सेवा कार्यों का आयोजन करते हैं।
पितृ मोक्ष के लिए भागवत कथा का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन और श्रवण पितरों की शांति एवं मोक्ष के लिए अत्यंत कल्याणकारी होता है। श्रद्धा और संकल्प के साथ की गई कथा, दान-पुण्य और भगवान की भक्ति से पितरों को तृप्ति प्राप्त होती है तथा परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। हरिद्वार जैसी मोक्षदायिनी नगरी में गंगा तट के समीप आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व और भी बढ़ जाता है।
वासुदेव आश्रम में चल रही यह कथा श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार और भक्ति से जोड़ने के साथ-साथ पितरों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का संदेश भी दे रही है। कथा स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है तथा श्रद्धालु भगवान की भक्ति में लीन होकर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
