हरिद्वार, भूपतवाला। हरिद्वार के वासुदेव आश्रम, भूपतवाला में गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के मूली निवासी श्रद्धालु श्री वासुदेव भाई के शुक्ला एवं समस्त शुक्ला परिवार द्वारा सर्वपितृ मोक्ष की कामना से सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ किया जा रहा है।
कथा का शुभारंभ 4 जून को भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्ममय वातावरण का निर्माण किया।
कथा व्यास पीठ पर विराजमान श्री दीपक भाई भट्ट (जूनागढ़, गुजरात) अपने श्रीमुख से श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथा का रसपान करा रहे हैं। कथा में भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के महत्व का विस्तार से वर्णन किया जा रहा है। प्रतिदिन कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हो रहे हैं। लगभग 200 श्रद्धालु गुजरात से शुक्ला परिवार के साथ हरिद्वार पहुंचे हैं और कथा के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, पूर्वजों के कल्याण और ईश्वर से जुड़ने का सर्वोत्तम माध्यम है। भागवत महापुराण में वर्णित भक्ति मार्ग मनुष्य को जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध कराता है तथा उसे मोक्ष की दिशा में अग्रसर करता है। कथा श्रवण से मन में सकारात्मकता, शांति और आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है
पुरुषोत्तम मास और पितृ मोक्ष का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी मास माना जाता है। इस मास में किए गए जप, तप, दान, व्रत, कथा श्रवण और भगवान के नाम-स्मरण का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। शास्त्रों में वर्णित है कि पुरुषोत्तम मास आत्मिक उन्नति, पापों के क्षय तथा ईश्वर कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है।
इसी प्रकार पितृ मोक्ष के लिए भी भागवत कथा, यज्ञ, तर्पण, दान और सत्कर्मों का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई धार्मिक साधनाओं से पूर्वजों को शांति प्राप्त होती है तथा परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण और आयोजन पितरों के कल्याण का एक प्रभावी आध्यात्मिक माध्यम माना गया है।
वासुदेव आश्रम में आयोजित यह कथा श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और संस्कारों से जोड़ने के साथ-साथ पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी संदेश दे रही है। कथा स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना हुआ है तथा श्रद्धालु भगवान के नाम-स्मरण और कथा श्रवण में भाव-विभोर होकर भाग ले रहे हैं।
