ममता चौहान
हरिद्वार। उत्तरी हरिद्वार में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास रमेश जी भाई ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी जी के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मणी जी की इच्छा और आग्रह पर उनसे विवाह किया। यह विवाह केवल सांसारिक संबंध नहीं, बल्कि जीव और परमात्मा के मिलन का आध्यात्मिक प्रतीक है, जो संपूर्ण जीव जगत के कल्याण का संदेश देता है।
कथा व्यास रमेश जी भाई ने कहा कि जब जीव का मिलन भगवान से हो जाता है तो उसका कल्याण निश्चित हो जाता है। श्रीमद् भागवत पुराण और श्रीरामचरितमानस हमें जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करते हैं। इन धर्मग्रंथों में पति-पत्नी, भाई-भाई, पिता-पुत्र तथा समाज के अन्य लोगों के साथ मधुर और मर्यादित संबंधों की शिक्षा दी गई है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि अपनी संतानों को अच्छे संस्कार दें और उन्हें ऋषि-मुनियों की परंपरा से जोड़ें। धर्मग्रंथों का अध्ययन करने के साथ-साथ उनके संदेश पर चिंतन और मनन भी करना चाहिए, ताकि जीवन में सुख, शांति और प्रसन्नता बनी रहे। उन्होंने कहा कि भक्ति के माध्यम से मनुष्य शक्ति प्राप्त कर सकता है और उसका जीवन सार्थक बन सकता है।
कथा व्यास ने कहा कि प्रत्येक परिवार में श्रीमद् भागवत महापुराण, श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीरामचरितमानस और हनुमान चालीसा का नियमित पाठ होना चाहिए। इससे घर का वातावरण सकारात्मक होता है और जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन आता है। उन्होंने कहा कि कलियुग में परम शांति प्राप्त करने का सरल मार्ग निरंतर प्रभु भक्ति और परमात्मा की शरण में रहना है।
कथा के दौरान रुक्मणी विवाह प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और वातावरण भक्तिमय हो उठा।
