लालढांग। हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र के लालढांग में रवासन नदी पर पुल निर्माण
की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। बरसात के दौरान तेज बहाव के बीच नदी पार करने को मजबूर ग्रामीणों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए बुधवार को हरिद्वार ग्रामीण विधायक अनुपमा रावत समर्थकों एवं ग्रामीणों के साथ रवासन नदी पहुंचीं और प्रदर्शन किया। विधायक ने शासन-प्रशासन को 10 दिनों के भीतर पुल निर्माण का कार्य शुरू करने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में निर्माण शुरू नहीं हुआ तो वह नदी किनारे आमरण अनशन शुरू करेंगी।
विधायक अनुपमा रावत ने कहा कि रवासन नदी पर पुल नहीं होने के कारण क्षेत्र के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों को बरसात के मौसम में जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। हाल ही में स्कूल से घर लौटते समय नदी के तेज बहाव में बहने से छात्र आर्यन भट्ट की मौत हो गई थी। इससे पहले भी एक ग्रामीण तेज धारा में बहकर लापता हो चुका है, जिसका अभी तक पता नहीं चल पाया है। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बावजूद पुल निर्माण में देरी पर विधायक ने सरकार को घेरा।
उन्होंने कहा कि रवासन नदी के दोनों ओर मीठी बेरी, रसूलपुर बड़ा, रसूलपुर छोटा, लालढांग सहित दर्जनों गांव बसे हुए हैं। इन गांवों के लोगों के लिए नदी पार करना रोजमर्रा की जरूरत है। बरसात में पहाड़ों से आने वाले पानी के कारण नदी का बहाव बेहद तेज हो जाता है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने लंबा रास्ता तय करने या जान जोखिम में डालकर नदी पार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
विधायक ने आरोप लगाया कि वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने लालढांग क्षेत्र में पुल निर्माण की स्वीकृति की पहल की थी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र से करीब तीन किलोमीटर दूर एक अन्य पुल का निर्माण भी कराया गया था, लेकिन सरकार बदलने के बाद लालढांग में प्रस्तावित पुल के निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। विधायक का आरोप है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में पुल निर्माण के लिए आवश्यक बजट जारी नहीं किया जा रहा है, जिसके चलते ग्रामीणों को परेशानी और जोखिम उठाना पड़ रहा है।
अनुपमा रावत ने कहा कि पुल निर्माण को लेकर वन विभाग और जिला प्रशासन की स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन शासन स्तर से बजट जारी नहीं होने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सरकार से तत्काल बजट जारी कर निर्माण शुरू कराने की मांग की।
विधायक ने यह भी मांग उठाई कि रवासन नदी पर बनने वाले प्रस्तावित पुल का नाम हादसे में जान गंवाने वाले छात्र आर्यन भट्ट के नाम पर रखा जाए, ताकि उसकी स्मृति हमेशा जीवित रहे और पुल क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण विधायक के समर्थन में नदी किनारे पहुंचे। ग्रामीणों ने भी पुल निर्माण में हो रही देरी पर नाराजगी जताई और सरकार से जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की।
प्रशासन की ओर से रवासन नदी की ओर जाने वाले रास्तों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और लोगों को तेज बहाव में नदी पार नहीं करने की सलाह दी जाती है। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि जरूरी आवागमन के लिए उन्हें मजबूरी में नदी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। विधायक अनुपमा रावत ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 10 दिनों के भीतर रवासन नदी पर प्रस्तावित झूला पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो वह नदी किनारे ही आमरण अनशन करेंगी।
